लखीमपुरिया ग्लोबल कनेक्ट समूह मंच के मचान ने बनाई आभासी दुनिया में अलग पहचान
अनिल कुमार श्रीवास्तव
केडीएस न्यूज डेस्क
अदृश्य राक्षस के रूप में चुनौती दे रही वैश्विक महामारी कोविड 19 से निपटने के लिए चल रहे लॉक डाउन के बीच एकता, पहचान, क्षेत्रीय जानकारी व रचनाओं के उत्थान के उद्देश्य से सक्रिय हुए लखीमपुरिया ग्लोबल कनेक्ट समूह ने आभासी दुनिया मे अलग पहचान बनाई है।जहां एक तरफ इस आभासी नेपथ्य में काव्यमंच की मचान पर चढ़कर तराई कवि ऑन लाइन लोगो को सम्मोहित कर रहे हैं वही विविध विधाओं में पारंगत रचनाधर्मी व मनीषी अपनी रचनाओं व विचारों की अविरल धारा बहाकर समूह से जुड़े लोगों को बेहतरीन सन्देश दे रहे हैं।
क्षेत्रीय समाजसेवी व योगगुरु भी प्रेरणादायी मिसाल पेश कर आभासी दुनिया मे सकारात्मक सन्देश दे रहे हैं।कोरोनाकाल में सक्रिय हुए इस समूह की सम्मोहन शक्ति ने आभासी दुनिया के जनमानस पर ऐसा असर डाला कि प्रदेश के सबसे बड़े जिले में अदृश्य राक्षस कोरोना भी असहाय नजर आया।शोषल मीडिया पर सक्रिय जिले के तमाम युवा लॉक डाउन नियमों की लक्ष्मण रेखा का पालन करते हुए समूह के रुचिकर विषयों में भाग लेते नजर आए।
गौरतलब है कि लॉक डाउन 2 में गृहवास के नियमों को देखते हुए शारीरिक दूरी का पालन करते हुए हार्दिक नजदीकी के उद्देश्य से क्षेत्रीय जानकारियों, जनकल्याणार्थ व विविध रचनाओं के उत्थान पर आधारित इस फ़ेसबुक ग्रुप का सृजन विगत 27 अप्रैल को किया गया था।हालांकि इसका आगाज जूम एप्प के माध्यम से लखीमपुर नगर पालिका अध्यक्ष निरुपमा वाजपेयी की अध्यक्षता में ऑन लाइन क्षेत्र से जुड़े कवियों 14 अप्रैल को ही कर दिया था।कोरोना से सतर्कता का पालन करते हुए शारीरिक दूरी और मानसिक नजदीकी बढ़ाने के उद्देश्य से रखी गयी ग्रुप की आधारशिला के बाद लगभग डेढ़ हजार लोगों ने काफी कम समय मे अपनी सक्रियता से नई इबारत लिखनी शुरू की जो क्षेत्र में बेहद सराहनीय रही।इस मंच की मचान पर चढ़ कर नित रचनाधर्मी अपनी नई और अलहदा रचनाओं से लोगो का मन मोहने के साथ ज्ञानबृद्धि भी कर रहे हैं।युवा कवि कुलदीप समर का काव्य पाठ हो या रीवर डॉक्टर विवेक दीक्षित के सामाजिक सन्देश में लिपटी रचना, गायक सुनील यादव, प्रतीक श्रीवास्तव की सुरों में पिरोयी प्रस्तुतियां हो या फिर अमेरिका से उपेंद्र, क्षेत्रीय अमित कैथवार की प्रस्तुतियां सभी अतुलनीय व सराहनीय रहीं।इसी प्रकार क्रमवार लाइव आकर फारुख सरल, आकाश गुप्ता, श्याम शेखर, सुमित तिवारी, आयुष राज खरे, सितांशु तिवारी, मानसी मिश्रा आदि ने लोगो को ऐसे मंत्रमुग्ध किया कि ऑनलाइन पर वाह वाह के बदले स्वरूप ने करतल ध्वनि के बजाय लाइक/कमेंट की परंपरा ईजाद कर दी।
दुधवा लाइव के संस्थापक के के मिश्रा ने भी लाइव आकर अपनी प्रस्तुति दी जो काफी सराही गयी।इसके अलावा योगगुरु मंगेश त्रिवेदी कोरोना के खिलाफ शरीर को चुस्त दुरुस्त रखने और इम्यून सिस्टम(रोग प्रतिरोधक क्षमता) को मजबूत रखने के महत्वपूर्ण गुर देने के साथ योग के महत्व को समय समय पर समझा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि इस फ़ेसबुक समूह ने कोरोनाकाल में सक्रियता के साथ प्रश्नोत्तर काल भी छेड दिया था ताकि लोगो को क्षेत्र के विषय मे नित नई जानकारियों से अपडेट रखा जाय।हरियाली की छटा बिखेरते सूबे के इस सबसे बड़े जिले का अपना स्वर्णिम इतिहास है जो आधुनिकता की अंधाधुंध दौड़ में धुंधला होता दिख रहा है इसके इतिहास पर आधारित तमाम ऐसे सवाल ऐसे भी आये जो शायद युवा पीढ़ी के लिए नए हों।ऋषि मुनियों का समय हो या देश की आजादी का, धार्मिक आस्था का हो या शैक्षिक समय समय पर हर क्षेत्र में अगुवाई करने वाली यह तराई तपोभूमि सदैव अग्रणी रही है।फ़ेसबुक की चर्चाओं में पर्यटन विकास व प्रतिभा विकास के विचारणीय बिंदुओं पर भी लगातार चर्चाएं हो रही हैं।सामाजिक सरोकारों से जुड़े तराई युवा इन विषयों पर चर्चा कर जिले के विकास को लेकर गम्भीर भी दिखे।खास बात यह रही कि वर्षो से बिछड़े तमाम पूर्व परिचित पुनः इस पटल पर मिले और अपनी स्मृतियां भी साझा कीं।कोरोना काल में लोगों को शारीरिक दूर और मानसिक नजदीक रखने के उद्देश्य से फेसबुक पर सक्रिय इस समूह का संचालन युवा समाजसेवी विवेक श्रीवास्तव, अरुण तापरिया माहेश्वरी, विशाल श्रीवास्तव पूरी मुस्तैदी के साथ कर रहे हैं।



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