भारत में भी जरूरी है जाल के साथ जल निकासी

भारत में भी जरूरी है जाल के साथ जल निकासी



केडीएस न्यूज़ नेटवर्क
जल है तो जीवन है के सिद्धांत पर आज विश्व के लगभग सभी देश चल पड़े हैं। परंतु कुछ ऐसे देश हैं जो इस संघर्ष में भारत से तेज चाल चल रहे हैं। ऐसे देशों में ही ऑस्ट्रेलिया भी शामिल है जो जाल के साथ जल निकासी के नेटवर्क का परीक्षण कर रहा है। इस तरीके से सीवर लाइनों के माध्यम से जो कचरा प्लास्टिक नदियों और समुद्र तक पहुंचता है उसे आसानी से रोका जा सकता है और इसीलिए अब इसे भारत में भी लागू करने की जरूरत है।

शहर में इस्तेमाल होने वाला तमाम सामान ऐसा होता है जो वेस्टेज के रूप में घरों के बाहर आता है। धीरे-धीरे यह नालियों के रास्ते नदियों तक पहुंचता है और उसके बाद हमारे समुद्र को भी गंदा करता है।

 खासकर नदियों में गंदगी के अंबार से हमारा पीने योग्य पानी भी संकट में पड़ गया है। आज हमें साफ पानी की बहुत ज्यादा जरूरत है, वरना हमारा आने वाला भविष्य अंधकार में हो जाएगा, क्योंकि पानी के बिना कुछ भी संभव नहीं है। जल ही जीवन है के सिद्धांत पर चलते हुए आज भारत को भी इस नेटवर्क परीक्षण की शुरुआत करने की जरूरत है। हालांकि भारत में नदियों की सफाई को लेकर तमाम तरह के अभियान चलाए जा रहे हैं परंतु उनका कोई ऐसा प्रभाव अभी तक नहीं दिखा है। जिससे आने वाले संकट को खत्म किया जा सके। 

ऑस्ट्रेलिया ने शुरू किया है जाल के साथ जल निकासी ही नेटवर्क


ऑस्ट्रेलिया ने जाल के साथ जल निकासी का जो एक नेटवर्क तैयार किया है इससे प्लास्टिक और अन्य प्रदूषण नदियों या समुद्र तट पहुंचने में रोकना काफी मददगार होगा। ऐसे में ऐसे विकासशील देशों को भी इसे अपनाना चाहिए जो आज अपनी नदियों की सफाई पर बहुत ज्यादा पैसा खर्च करने का जोखिम नहीं उठाना चाहते हैं। इन्हीं विकासशील देशों में भारत एक ऐसा देश है जिससे अनिवार्य रूप से इस नेटवर्क के माध्यम से नदियों की सफाई के एक नए अभियान को शुरू करना चाहिए।

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