भारतीयों के लिए यह जानना जरूरी है कि खतरा अभी टला नहीं है

भारतीयों के लिए यह जानना जरूरी है कि खतरा अभी टला नहीं है



चीन नहीं तैयार है पीछे हटने को एलएसी पर खतरा अभी भी टला नहीं है                                           

सोमेश यादव 
केडीएस न्यूज़ नेटवर्क

चीन की हरकतों से सीख लेकर भारत लगातार  अपने को मजबूत करता चला आ रहा है। वहींं  भारतीय सेना भी अब अपनी कमर पूरी तरह से कर चुकी है। हालांकि चीन द्वारा लगातार ऐसी हरकतें की जा रहे हैं, जिन्हें देखकर या सुनकर आप यह समझेंगे कि शायद भारत और चीन के बीच चल रही खिंचा तान खत्म होने वाली है, परंतु ऐसा नहीं है। पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव लगातार बरकरार है ड्रैगन (चीन) हटने को बिल्कुल भी तैयार नहीं है चीन की चालबाज़ी को देखते हुए भारतीय सेना ने दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब देना के लिए कमर कस ली है। लद्दाख में भीषण ठंड पड़ती है। ऐसे में यहां के मौसम को देखते हुए भारतीय सेना ने सारी तैयारियां पूरी कर ली है। सीमा पर हमारे सैनिकों को हथियार की कोई कमी नहीं है। अब ठंड से बचने के लिए दूसरे सामान जैसे कि खास कपड़े, स्पेशल टेंट्स, गाड़ियों के लिए ईंधन और राशन पानी जमा कर लिए गए है। ठंड के दिनों में बर्फबारी के चलते सीमा पर कोई भी समान पहुंचाना मुश्किल चुनौती होगी।



अंग्रेजी अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया ने एक सीनियर आर्मी ऑफिसर के हवाले दावा किया है कि हर साल लद्दाख में 30 हज़ार मैट्रिक टन राशन की जरूरत पड़ती है, लेकिन इस साल दोगुने राशन की जरूरत है, क्योंकि इन दिनों वहां हज़ारों सैनिक तैनात हैं। उन्होंने कहा, 'चीन के सैनिक जल्दी एलएसी से पीछे हटने को तैयार नहीं है। लिहाज़ा हमलोग लंबे वक्त के लिए तैयारियां कर रहे हैं। इस साल मई से ही एलएसी के फॉरवार्ड इलाकों में भारत ने तीन गुना ज्यादा सैनिक तैनात किए हैं। ज्यादातर इलाके 15 हज़ार फीट की ऊंचाई पर है। बर्फबारी के चलते नवंबर के बाद यहां पहुंचना मुश्किल चुनौती होती है। आमतौर पर उत्तर भारत से ट्रक के जरिए यहां सामान दो रास्तों से भेजा जाता है- पहला ज़ोजी ला पास होते हुए श्रीनगर से लद्दाख और दूसरा रास्ता है रोहतांग पास होते हुए मनाली। ये रास्ते सिर्फ मई से लेकर अक्टूबर तक ही खुले रहते हैं। वैसे सेना को सामान चड़ीगढ़ से हवाई जहाज के जरिए भी भेजा जाता है। लेकिन इतना सारा समान भेजना संभव नहीं होता। 

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